चित्तौड़गढ़ गंगरार मान्यता विवाद में घिरी मेवाड़ यूनिवर्सिटी, कार्रवाई किस पर? न्याय मांगने वाले छात्रों पर ही पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग की मान्यता पर उठे सवाल, छात्रों का भविष्य अंधेरे में विरोध के बीच 17 विद्यार्थी गिरफ्तार
चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार क्षेत्र में स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी इन दिनों बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम की मान्यता को लेकर गंभीर विवाद का केंद्र बनी हुई है। चार वर्षों से इस पाठ्यक्रम में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों ने अब अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई है। छात्रों का कहना है कि उन्हें शुरुआत में यह भरोसा दिलाया गया था कि बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम पूरी तरह मान्यता प्राप्त है, लेकिन पढ़ाई के दौरान ही उन्हें पता चला कि आवश्यक मान्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

विद्यार्थियों के अनुसार वर्ष 2022 में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने इस कोर्स में प्रवेश लिया था। प्रवेश के समय विश्वविद्यालय परिसर में लगे प्रचार बोर्ड और जानकारी के आधार पर उन्हें यह विश्वास दिलाया गया था कि पाठ्यक्रम सभी आवश्यक मानकों के अनुरूप है। लेकिन समय बीतने के साथ कई विद्यार्थियों को संदेह होने लगा और जब उन्होंने जानकारी जुटाई तो मान्यता से जुड़ी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। इसी बात ने धीरे-धीरे छात्रों के भीतर असंतोष और चिंता को जन्म दिया।

अब स्थिति यह है कि इस बैच के अधिकांश विद्यार्थी अंतिम वर्ष में पहुंच चुके हैं और जल्द ही अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं होनी हैं। ऐसे समय में यदि पाठ्यक्रम की मान्यता को लेकर कोई बाधा सामने आती है तो उनकी डिग्री और करियर पर सीधा असर पड़ सकता है। कई छात्र-छात्राएं ऐसे परिवारों से आते हैं जिन्होंने बड़ी उम्मीदों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपने बच्चों को नर्सिंग की पढ़ाई के लिए यहां भेजा था। इसी कारण विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके परिजनों में भी गहरी चिंता और निराशा का माहौल बन गया है।

बीते दिनों इसी मुद्दे को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्र-छात्राओं ने प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगते हुए अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग उठाई। विरोध के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और परिसर में अव्यवस्था की स्थिति भी देखने को मिली। हालात को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुछ समय के लिए अनिश्चितकालीन अवकाश घोषित कर दिया और मार्च में प्रस्तावित परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया गया।

जब विश्वविद्यालय दोबारा खोला गया और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हुईं तो विद्यार्थियों ने फिर से प्रशासन से जवाब मांगा। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से उन्हें अलग-अलग स्तर पर यह बताया जाता रहा कि मान्यता से जुड़ी फाइल उच्च स्तर पर लंबित है और जल्द समाधान हो जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। इस कारण छात्रों के मन में असमंजस और बढ़ गया है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस की मौजूदगी के बीच कुछ विद्यार्थियों को हिरासत में भी लिया गया। बाद में जानकारी सामने आई कि करीब 17 छात्रों को राजकार्य में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई ने छात्रों के आक्रोश को और बढ़ा दिया।

दूसरी ओर विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के चेयरमैन अशोक गदिया, कुलपति सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गंगरार थाने में मामला दर्ज करवाया है। छात्रों का कहना है कि उन्हें न्याय की उम्मीद है और वे चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। उनका आरोप है कि अब तक इस विषय पर कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चिंता विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर है। चार वर्षों की मेहनत, समय और बड़ी आर्थिक राशि दांव पर लगी हुई है। छात्र-छात्राएं यही सवाल उठा रहे हैं कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उनकी पढ़ाई और करियर का क्या होगा। फिलहाल यह मुद्दा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में प्रशासन इस स्थिति का समाधान किस तरह निकालता है।

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